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श्लोक  7.100.7-8h 
किमाह मातुलो वाक्यं यदर्थं भगवानिह॥ ७॥
प्राप्तो वाक्यविदां श्रेष्ठ: साक्षादिव बृहस्पति:।
 
 
अनुवाद
ब्रह्मर्षि! मेरे मामा ने क्या सन्देश दिया है, जिसके लिए आप, महामुनि, जो स्वयं बृहस्पति के समान वाक्य के विशेषज्ञों में श्रेष्ठ हैं, यहाँ आने का कष्ट उठा रहे हैं।'
 
Brahmarshi! What message has my maternal uncle given, for which you, the revered Maharshi, who is the best among experts of sentences like Brihaspati himself, have taken the trouble of coming here.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)