श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 100: केकयदेश से ब्रह्मर्षि गार्ग्य का भेंट लेकर आना और उनके संदेश के अनुसार श्रीराम की आज्ञा से कुमारों सहित भरत का गन्धर्व देश पर आक्रमण करने के लिये प्रस्थान  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  7.100.22 
मांसाशिनश्च ये सत्त्वा रक्षांसि सुमहान्ति च।
अनुजग्मुर्हि भरतं रुधिरस्य पिपासया॥ २२॥
 
 
अनुवाद
मांसभक्षी पशु और बड़े-बड़े राक्षस रक्त पीने की इच्छा से युद्ध में भरत के पीछे-पीछे आ गए ॥22॥
 
Carnivorous animals and big demons followed Bharat in the war with the desire to drink blood. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)