श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 100: केकयदेश से ब्रह्मर्षि गार्ग्य का भेंट लेकर आना और उनके संदेश के अनुसार श्रीराम की आज्ञा से कुमारों सहित भरत का गन्धर्व देश पर आक्रमण करने के लिये प्रस्थान  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  7.100.21 
सा सेना शक्रयुक्तेव नगरान्निर्ययावथ।
राघवानुगता दूरं दुराधर्षा सुरैरपि॥ २१॥
 
 
अनुवाद
वह सेना इंद्र द्वारा प्रेरित देवताओं की सेना के समान नगर से निकली। भगवान श्रीराम भी उसके साथ बहुत दूर तक चले। उसे पराजित करना देवताओं के लिए भी कठिन था।
 
That army came out of the city like the army of gods inspired by Indra. Lord Shri Ram also accompanied it for a long distance. It was difficult to defeat even for the gods.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)