श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 100: केकयदेश से ब्रह्मर्षि गार्ग्य का भेंट लेकर आना और उनके संदेश के अनुसार श्रीराम की आज्ञा से कुमारों सहित भरत का गन्धर्व देश पर आक्रमण करने के लिये प्रस्थान  »  श्लोक 2-3
 
 
श्लोक  7.100.2-3 
दश चाश्वसहस्राणि प्रीतिदानमनुत्तमम्॥ २॥
कम्बलानि च रत्नानि चित्रवस्त्रमथोत्तमम्।
रामाय प्रददौ राजा शुभान्याभरणानि च॥ ३॥
 
 
अनुवाद
उनके साथ ही उन्होंने दस हजार घोड़े, बहुत से कम्बल (कालीन और शाल आदि), नाना प्रकार के रत्न, नाना प्रकार के सुन्दर वस्त्र और सुन्दर आभूषण भी श्री रामजी को प्रेम के उत्तम उपहार स्वरूप भेंट करने के लिए दिए॥2-3॥
 
Along with them, he also gave ten thousand horses, many blankets (carpets and shawls etc.), various kinds of gems, various beautiful clothes and beautiful ornaments to offer to Shri Rama as the most excellent gift of love. ॥2-3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)