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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 7: उत्तर काण्ड
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सर्ग 100: केकयदेश से ब्रह्मर्षि गार्ग्य का भेंट लेकर आना और उनके संदेश के अनुसार श्रीराम की आज्ञा से कुमारों सहित भरत का गन्धर्व देश पर आक्रमण करने के लिये प्रस्थान
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श्लोक 18
श्लोक
7.100.18
निवेश्य ते पुरवरे आत्मजौ संनिवेश्य च।
आगमिष्यति मे भूय: सकाशमतिधार्मिक:॥ १८॥
अनुवाद
उन दोनों उत्तम नगरों में निवास करके तथा अपने दोनों पुत्रों को वहाँ स्थापित करके, परम पुण्यात्मा भरत पुनः मेरे पास लौट आएंगे। ॥18॥
"Having inhabited those two excellent cities and having established his two sons there, the extremely virtuous Bharata will again return to me." ॥18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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