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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 7: उत्तर काण्ड
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सर्ग 100: केकयदेश से ब्रह्मर्षि गार्ग्य का भेंट लेकर आना और उनके संदेश के अनुसार श्रीराम की आज्ञा से कुमारों सहित भरत का गन्धर्व देश पर आक्रमण करने के लिये प्रस्थान
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श्लोक 14
श्लोक
7.100.14
तच्छ्रुत्वा राघव: प्रीतो महर्षेर्मातुलस्य च।
उवाच बाढमित्येव भरतं चान्ववैक्षत॥ १४॥
अनुवाद
महर्षि और उनके मामा के वचन सुनकर श्री रघुनाथजी बहुत प्रसन्न हुए और भरत की ओर देखकर बोले - 'बहुत अच्छा।'॥14॥
Hearing the words of Maharshi and his uncle, Shri Raghunath was very pleased. He looked at Bharata and said, 'Very good.' ॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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