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श्लोक  7.100.1-2h 
कस्यचित् त्वथ कालस्य युधाजित् केकयो नृप:।
स्वगुरुं प्रेषयामास राघवाय महात्मने॥ १॥
गार्ग्यमङ्गिरस: पुत्रं ब्रह्मर्षिममितप्रभम्।
 
 
अनुवाद
कुछ समय के बाद केकयदेश के राजा युधाजित ने अपने पुरोहित अमित तेजस्वी ब्रह्मर्षि गार्ग्य, जो अंगिरा के पुत्र थे, को महात्मा श्री रघुनाथजी के पास भेजा।
 
After some time, King Yudhajit of Kekayadesh sent his priest Amit Tejasvi Brahmarshi Gargya, who was the son of Angira, to Mahatma Shri Raghunathji.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)