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ramayan 7.10.8: इसके बाद विभीषण ने अपने हाथ और सिर ऊपर उठाये और स्वयं को अध्ययन में समर्पित कर दिया तथा पांच हजार वर्षों तक सूर्यदेव की आराधना की।   |   ramayan सर्ग 7.10: रावण आदि की तपस्या और वर-प्राप्ति   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 10: रावण आदि की तपस्या और वर-प्राप्ति  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.10.8 
पञ्चवर्षसहस्राणि सूर्यं चैवान्ववर्तत।
तस्थौ चोर्ध्वशिरोबाहु: स्वाध्याये धृतमानस:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद विभीषण ने अपने हाथ और सिर ऊपर उठाये और स्वयं को अध्ययन में समर्पित कर दिया तथा पांच हजार वर्षों तक सूर्यदेव की आराधना की।
 
‘Thereafter Vibhishana raised his arms and head and devoted himself to study and worshipped the Sun God for five thousand years.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)