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ramayan 7.10.46-47: 'तब देवी सरस्वती ने उस राक्षस को भी मुक्त कर दिया। देवताओं के ब्रह्माजी के साथ आकाश में चले जाने पर जब देवी सरस्वती उसके ऊपर से उतरीं, तब दुष्ट कुंभकर्ण सावधान हो गया और दुखी होकर इस प्रकार चिंता करने लगा। 46-47।   |   ramayan सर्ग 7.10: रावण आदि की तपस्या और वर-प्राप्ति   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 10: रावण आदि की तपस्या और वर-प्राप्ति  »  श्लोक 46-47
 
 
श्लोक  7.10.46-47 
देवी सरस्वती चैव राक्षसं तं जहौ पुन:।
ब्रह्मणा सह देवेषु गतेषु च नभ:स्थलम्॥ ४६॥
विमुक्तोऽसौ सरस्वत्या स्वां संज्ञां च ततो गत:।
कुम्भकर्णस्तु दुष्टात्मा चिन्तयामास दु:खित:॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
'तब देवी सरस्वती ने उस राक्षस को भी मुक्त कर दिया। देवताओं के ब्रह्माजी के साथ आकाश में चले जाने पर जब देवी सरस्वती उसके ऊपर से उतरीं, तब दुष्ट कुंभकर्ण सावधान हो गया और दुखी होकर इस प्रकार चिंता करने लगा। 46-47।
 
‘Then Goddess Saraswati also released that demon. When Goddess Saraswati descended from above him after the gods went into the sky with Lord Brahma, then the evil Kumbhakarna became alert and became sad and started worrying in this manner. 46-47.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)