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ramayan 7.10.37-38h: हे ब्रह्म! इसने नंदनवन की सात अप्सराओं, देवराज इन्द्र के दस सेवकों तथा अनेक ऋषियों और मनुष्यों को भी खा लिया है। 37 1/2   |   ramayan सर्ग 7.10: रावण आदि की तपस्या और वर-प्राप्ति   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 10: रावण आदि की तपस्या और वर-प्राप्ति  »  श्लोक 37-38h
 
 
श्लोक  7.10.37-38h 
नन्दनेऽप्सरस: सप्त महेन्द्रानुचरा दश॥ ३७॥
अनेन भक्षिता ब्रह्मन्नृषयो मानुषास्तथा।
 
 
अनुवाद
हे ब्रह्म! इसने नंदनवन की सात अप्सराओं, देवराज इन्द्र के दस सेवकों तथा अनेक ऋषियों और मनुष्यों को भी खा लिया है। 37 1/2
 
Brahman! He has eaten the seven Apsaras of Nandanvana, ten attendants of Devraja Indra and many sages and humans as well. 37 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)