Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.10.23-25h: ‘भोले राक्षस! सुनो – मैं प्रसन्न होकर तुम्हें पुनः यह शुभ वर दे रहा हूँ – तुम्हारे वे सभी सिर, जिन्हें तुमने पहले अग्नि में अर्पित किया था, पूर्ववत् तुम्हारे सामने प्रकट हो जाएँगे। हे भद्र! इसके अतिरिक्त मैं तुम्हें एक और दुर्लभ वर दे रहा हूँ – जब भी तुम कोई रूप धारण करना चाहोगे, अपनी इच्छानुसार वह रूप धारण करोगे।’॥23-24 1/2॥ | ramayan सर्ग 7.10: रावण आदि की तपस्या और वर-प्राप्ति । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
‘भोले राक्षस! सुनो – मैं प्रसन्न होकर तुम्हें पुनः यह शुभ वर दे रहा हूँ – तुम्हारे वे सभी सिर, जिन्हें तुमने पहले अग्नि में अर्पित किया था, पूर्ववत् तुम्हारे सामने प्रकट हो जाएँगे। हे भद्र! इसके अतिरिक्त मैं तुम्हें एक और दुर्लभ वर दे रहा हूँ – जब भी तुम कोई रूप धारण करना चाहोगे, अपनी इच्छानुसार वह रूप धारण करोगे।’॥23-24 1/2॥
‘Innocent demon! Listen – I am pleased and granting you this auspicious boon again – all the heads of yours that you had offered in the fire earlier will appear before you as before. Gentle one! Apart from this, I am giving you another rare boon here – whenever you wish to assume any form, you will assume that form according to your wish.’॥ 23-24 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥