श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 10: रावण आदि की तपस्या और वर-प्राप्ति  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  7.10.19 
सुपर्णनागयक्षाणां दैत्यदानवरक्षसाम्।
अवध्योऽहं प्रजाध्यक्ष देवतानां च शाश्वत॥ १९॥
 
 
अनुवाद
सनातन प्रजापते! मैं गरुड़, नाग, यक्ष, दैत्य, दानव, राक्षस और देवताओं के लिए अविनाशी बन जाऊं। 19॥
 
Sanatan Prajapate! May I become indestructible to Garuda, Naga, Yaksha, Daitya, Demon, Rakshas and Gods. 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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