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ramayan 7.10.14: हे धर्म के ज्ञाता! शीघ्र ही अपना इच्छित वर मांग लो। बताओ, आज मैं तुम्हारी कौन-सी इच्छा पूरी करूँ? तुम्हारा प्रयास व्यर्थ न जाए।॥14॥   |   ramayan सर्ग 7.10: रावण आदि की तपस्या और वर-प्राप्ति   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 10: रावण आदि की तपस्या और वर-प्राप्ति  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.10.14 
शीघ्रं वरय धर्मज्ञ वरो यस्तेऽभिकांक्षित:।
कं ते कामं करोम्यद्य न वृथा ते परिश्रम:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
हे धर्म के ज्ञाता! शीघ्र ही अपना इच्छित वर मांग लो। बताओ, आज मैं तुम्हारी कौन-सी इच्छा पूरी करूँ? तुम्हारा प्रयास व्यर्थ न जाए।॥14॥
 
O knower of Dharma! Ask for the boon you desire quickly. Tell me, which of your wishes should I fulfill today? Your efforts should not go in vain.'॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)