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ramayan 7.10.11: इस प्रकार एक-एक करके उसके नौ हजार वर्ष बीत गए और उसके नौ सिर भी अग्निदेव को अर्पित कर दिए गए।   |   ramayan सर्ग 7.10: रावण आदि की तपस्या और वर-प्राप्ति   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 10: रावण आदि की तपस्या और वर-प्राप्ति  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.10.11 
एवं वर्षसहस्राणि नव तस्यातिचक्रमु:।
शिरांसि नव चाप्यस्य प्रविष्टानि हुताशनम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार एक-एक करके उसके नौ हजार वर्ष बीत गए और उसके नौ सिर भी अग्निदेव को अर्पित कर दिए गए।
 
In this way, one by one his nine thousand years passed and his nine heads were also offered to Agnidev.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)