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ramayan 7.1.7-8h: वे सभी अग्नि के समान तेजस्वी, वेदों के ज्ञाता और नाना प्रकार के शास्त्रों पर विचार करने में निपुण थे। महात्मा मुनि श्री रघुनाथजी के राजभवन में पहुँचकर वे उनके आगमन की सूचना देने के लिए चबूतरे पर खड़े हो गए।   |   ramayan सर्ग 7.1: श्रीराम के दरबार में महर्षियों का आगमन, उनके साथ उनकी बातचीत तथा श्रीराम के प्रश्न   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 1: श्रीराम के दरबार में महर्षियों का आगमन, उनके साथ उनकी बातचीत तथा श्रीराम के प्रश्न  »  श्लोक 7-8h
 
 
श्लोक  7.1.7-8h 
सम्प्राप्यैते महात्मानो राघवस्य निवेशनम्।
विष्ठिता: प्रतिहारार्थं हुताशनसमप्रभा:॥ ७॥
वेदवेदाङ्गविदुषो नानाशास्त्रविशारदा:।
 
 
अनुवाद
वे सभी अग्नि के समान तेजस्वी, वेदों के ज्ञाता और नाना प्रकार के शास्त्रों पर विचार करने में निपुण थे। महात्मा मुनि श्री रघुनाथजी के राजभवन में पहुँचकर वे उनके आगमन की सूचना देने के लिए चबूतरे पर खड़े हो गए।
 
All of them were as bright as fire, learned in the Vedas and adept in considering various types of scriptures. After reaching the royal palace of Mahatma Muni Shri Raghunathji, he stood on the platform to inform about his arrival. 7 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)