Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.1.20: 'धर्मात्मा राजन! आपके भाई लक्ष्मण सदैव आपके कल्याण में लगे रहते हैं। अब आप उनके, भरत-शत्रुघ्न और अपनी माताओं के साथ यहाँ सुखपूर्वक निवास कर रहे हैं और हमें आपके इस रूप के दर्शन हो रहे हैं, यह हमारा सौभाग्य है।' | ramayan सर्ग 7.1: श्रीराम के दरबार में महर्षियों का आगमन, उनके साथ उनकी बातचीत तथा श्रीराम के प्रश्न । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
लक्ष्मणेन च धर्मात्मन् भ्रात्रा त्वद्धितकारिणा।
मातृभिर्भ्रातृसहितं पश्यामोऽद्य वयं नृप॥ २०॥
अनुवाद
'धर्मात्मा राजन! आपके भाई लक्ष्मण सदैव आपके कल्याण में लगे रहते हैं। अब आप उनके, भरत-शत्रुघ्न और अपनी माताओं के साथ यहाँ सुखपूर्वक निवास कर रहे हैं और हमें आपके इस रूप के दर्शन हो रहे हैं, यह हमारा सौभाग्य है।'
‘Dharmatma King! Your brother Lakshmana is always engaged in your welfare. You are now happily residing here with him, Bharat-Shatrughna and your mothers and we are getting to see you in this form, this is our good fortune.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥