| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 6: युद्ध काण्ड » सर्ग 99: श्रीराम और रावण का युद्ध » श्लोक 47-48h |
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| | | | श्लोक 6.99.47-48h  | अग्निदीप्तमुखान् बाणांस्तत्र सूर्यमुखानपि।
चन्द्रार्धचन्द्रवक्त्रांश्च धूमकेतुमुखानपि।
ग्रहनक्षत्रवर्णांश्च महोल्कामुखसंस्थितान्॥ ४७॥
विद्युज्जिह्वोपमांश्चापि ससर्ज विविधाञ्छरान्। | | | | | | अनुवाद | | उसके द्वारा उन्होंने अग्नि, सूर्य, चन्द्रमा, अर्धचन्द्र, धूमकेतु, ग्रह, नक्षत्र, उल्काएँ तथा बिजली के समान प्रज्वलित मुख वाले नाना प्रकार के बाण प्रकट किए ॥47 1/2॥ | | | | Through that he manifested fire, sun, moon, crescent, comet, planets, constellations, meteors and various types of arrows with flaming mouths similar to the light of lightning. 47 1/2॥ | | ✨ ai-generated | | |
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