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ramayan 6.99.26: वे दोनों वहाँ बहुत समय तक विचित्र प्रकार से युद्ध करते हुए विचरण करते रहे। अपने बाणों के बल से एक-दूसरे को घायल करते हुए भी वे दोनों वीर कभी पराजित नहीं हुए॥ 26॥   |   ramayan सर्ग 6.99: श्रीराम और रावण का युद्ध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 99: श्रीराम और रावण का युद्ध  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  6.99.26 
चेरतुश्च चिरं चित्रं मण्डलं सव्यदक्षिणम्।
बाणवेगात् समुत्क्षिप्तावन्योन्यमपराजितौ॥ २६॥
 
 
अनुवाद
वे दोनों वहाँ बहुत समय तक विचित्र प्रकार से युद्ध करते हुए विचरण करते रहे। अपने बाणों के बल से एक-दूसरे को घायल करते हुए भी वे दोनों वीर कभी पराजित नहीं हुए॥ 26॥
 
Both of them kept roaming there for a long time, maneuvering in strange ways. Wounding each other with the force of their arrows, both these brave men were never defeated.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)