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ramayan 6.99.1-2: महाबली विरुपाक्ष तो मारा ही गया; महोदर और महापार्श्व भी काल के मुँह में चले गए - यह देखकर उस महासमर में रावण का हृदय महान क्रोध से भर गया। उसने सारथि को रथ आगे बढ़ाने की आज्ञा दी और इस प्रकार कहा- 1-2॥   |   ramayan सर्ग 6.99: श्रीराम और रावण का युद्ध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.99.1-2 
महोदरमहापार्श्वौ हतौ दृष्ट्वा स रावण:।
तस्मिंश्च निहते वीरे विरूपाक्षे महाबले॥ १॥
आविवेश महान् क्रोधो रावणं तु महामृधे।
सूतं संचोदयामास वाक्यं चेदमुवाच ह॥ २॥
 
 
अनुवाद
महाबली विरुपाक्ष तो मारा ही गया; महोदर और महापार्श्व भी काल के मुँह में चले गए - यह देखकर उस महासमर में रावण का हृदय महान क्रोध से भर गया। उसने सारथि को रथ आगे बढ़ाने की आज्ञा दी और इस प्रकार कहा- 1-2॥
 
The mighty warrior Virupaksha was definitely killed; Mahodar and Mahaparshva were also thrown into the jaws of Kaal - seeing this, Ravana's heart was filled with great anger in that great battle. He ordered the charioteer to move the chariot forward and said thus: 1-2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)