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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 98: अङ्गद के द्वारा महापार्श्व का वध.  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  6.98.21-22h 
राक्षसस्य स्तनाभ्याशे मर्मज्ञो हृदयं प्रति॥ २१॥
इन्द्राशनिसमस्पर्शं स मुष्टिं विन्यपातयत्।
 
 
अनुवाद
वह हृदय के महत्वपूर्ण भागों को जानता था; इसलिए उसने राक्षस की छाती पर उसके स्तनों के पास बड़े जोर से प्रहार किया, जिसका स्पर्श इन्द्र के वज्र के समान असहनीय था।
 
He knew the vital parts of the heart; thus, he struck the demon on his chest near his breasts with a great force, the touch of which was as intolerable as Indra's thunderbolt.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)