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ramayan 6.98.13-15h: उसका परिघ सूर्य की किरणों के समान चमक बिखेर रहा था। बालिपुत्र अंगद की आँखें क्रोध से लाल हो गई थीं। उसने उस लोहे के परिघ को दोनों हाथों में पकड़कर घुमाया और दूर खड़े महापार्श्व को मारने के लिए बड़े वेग से फेंका।   |   ramayan सर्ग 6.98: अङ्गद के द्वारा महापार्श्व का वध.   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 98: अङ्गद के द्वारा महापार्श्व का वध.  »  श्लोक 13-15h
 
 
श्लोक  6.98.13-15h 
तस्याङ्गद: सरोषाक्षो राक्षसस्य तमायसम्॥ १३॥
दूरस्थितस्य परिघं रविरश्मिसमप्रभम्।
द्वाभ्यां भुजाभ्यां संगृह्य भ्रामयित्वा च वेगवत्॥ १४॥
महापार्श्वस्य चिक्षेप वधार्थं वालिन: सुत:।
 
 
अनुवाद
उसका परिघ सूर्य की किरणों के समान चमक बिखेर रहा था। बालिपुत्र अंगद की आँखें क्रोध से लाल हो गई थीं। उसने उस लोहे के परिघ को दोनों हाथों में पकड़कर घुमाया और दूर खड़े महापार्श्व को मारने के लिए बड़े वेग से फेंका।
 
His Parigha was radiating its glow like the rays of the Sun. Vali's son Angad's eyes had become red with anger. He held that iron Parigha in both his hands, rotated it and threw it with great force to kill Mahaparsva who was standing far away.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)