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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 98: अङ्गद के द्वारा महापार्श्व का वध.  »  श्लोक 12-13h
 
 
श्लोक  6.98.12-13h 
ऋक्षराजं गवाक्षं च जघान बहुभि: शरै:।
गवाक्षं जाम्बवन्तं च स दृष्ट्वा शरपीडितौ॥ १२॥
जग्राह परिघं घोरमङ्गद: क्रोधमूर्च्छित:।
 
 
अनुवाद
इतना ही नहीं, उन्होंने भालुओं के राजा गवाक्ष को भी अनेक बाणों से घायल कर दिया। गवाक्ष और जाम्बवान को बाणों से पीड़ित देखकर अंगद के क्रोध की सीमा न रही। उन्होंने भयंकर परिघ को हाथ में ले लिया।
 
Not only this, he also injured Gavaksh, the king of bears, with many arrows. Seeing Gavaksh and Jambavan suffering from the arrows, Angad's anger knew no bounds. He took the dreadful Parigha in his hand.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)