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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 98: अङ्गद के द्वारा महापार्श्व का वध.  »  श्लोक 10-11
 
 
श्लोक  6.98.10-11 
मुहूर्ताल्लब्धसंज्ञस्तु महापार्श्वो महाबल:॥ १०॥
अङ्गदं बहुभिर्बाणैर्भूयस्तं प्रत्यविध्यत।
जाम्बवन्तं त्रिभिर्बाणैराजघान स्तनान्तरे॥ ११॥
 
 
अनुवाद
दो घंटे बाद होश में आने पर महाबली महापार्श्व ने पुनः अनेक बाणों से अंगद को घायल कर दिया तथा जाम्बवान की छाती में भी तीन बाण मारे।
 
After regaining consciousness after two hours, the mighty Mahaparsva again injured Angada with many arrows and also shot three arrows into Jambavan's chest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)