श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 97: सुग्रीव के साथ महोदर का घोर युद्ध तथा वध  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  6.97.38 
अथ विजयमवाप्य वानरेन्द्र:
समरमुखे सुरसिद्धयक्षसङ्घै:।
अवनितलगतैश्च भूतसङ्घै-
र्हरुषसमाकुलितैर्निरीक्ष्यमाण:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार युद्ध के कगार पर विजय पाकर वानरराज सुग्रीव अत्यन्त शोभायमान दिखाई देने लगे। उस समय देवता, सिद्ध, यक्ष तथा पृथ्वी पर रहने वाले प्राणियों के समूह भी बड़े हर्ष से उनकी ओर देखने लगे।
 
In this way, the monkey king Sugreeva started looking very glorious after getting victory at the brink of battle. At that time, the groups of gods, Siddhas and Yakshas and the groups of creatures living on the earth also started looking at him with great joy. 38.
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये युद्धकाण्डे सप्तनवतितम: सर्ग: ॥ ९ ७॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके युद्धकाण्डमें सत्तानबेवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ९ ७॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)