श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 97: सुग्रीव के साथ महोदर का घोर युद्ध तथा वध  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  6.97.37 
महोदरं तं विनिपात्य भूमौ
महागिरे: कीर्णमिवैकदेशम्।
सूर्यात्मजस्तत्र रराज लक्ष्म्या
सूर्य: स्वतेजोभिरिवाप्रधृष्य:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
महोदर का शरीर किसी विशाल पर्वत के टूटे हुए शिखर के समान प्रतीत हो रहा था। उसे पृथ्वी पर गिराकर सूर्यपुत्र सुग्रीव वहाँ विजय-लक्ष्मी से शोभायमान होने लगे, मानो प्रज्वलित सूर्यदेव अपने तेज से चमक रहे हों।
 
Mahodar's body looked like a broken peak of a great mountain. After dropping him on the earth, Suryaputra Sugreev started to look beautiful there with victory-lakshmi, as if the blazing Sun God was shining with his brilliance.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)