श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 97: सुग्रीव के साथ महोदर का घोर युद्ध तथा वध  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  6.97.30 
ततो रोषपरीताङ्गौ नदन्तावभ्यधावताम्।
उद्यतासी रणे हृष्टौ युधि शस्त्रविशारदौ॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
महोदर और सुग्रीव दोनों ही युद्धभूमि में अस्त्र-शस्त्र चलाने में निपुण थे, और दोनों के शरीर क्रोध से भरे हुए थे; इसलिए वे हर्ष और उत्साह से भरकर, तलवारें उठाकर, गर्जना करते हुए एक-दूसरे पर टूट पड़े।
 
Mahodara and Sugreeva were both adept in the art of using weapons on the battlefield and both their bodies were affected with fury; therefore, filled with joy and enthusiasm, they attacked each other roaring, raising their swords.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)