श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 97: सुग्रीव के साथ महोदर का घोर युद्ध तथा वध  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  6.97.3 
प्रक्षीणं स्वबलं दृष्ट्वा वध्यमानं वलीमुखै:।
बभूवास्य व्यथा युद्धे दृष्ट्वा दैवविपर्ययम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वानरों के आक्रमण से अपनी सेना को दुर्बल होते देख और भाग्य के फेर को देखकर वह युद्धभूमि में बहुत दुःखी हुआ ॥3॥
 
Seeing his army weakened by the attack of the monkeys, and looking at the twists and turns of destiny, he felt very sad on the battlefield. ॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)