श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 96: सुग्रीव द्वारा राक्षस सेना का संहार और विरूपाक्ष का वध  »  श्लोक 13-14
 
 
श्लोक  6.96.13-14 
अथ संक्षीयमाणेषु राक्षसेषु समन्तत:।
सुग्रीवेण प्रभग्नेषु नदत्सु च पतत्सु च॥ १३॥
विरूपाक्ष: स्वकं नाम धन्वी विश्राव्य राक्षस:।
रथादाप्लुत्य दुर्धर्षो गजस्कन्धमुपारुहत्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
जब इस प्रकार सुग्रीव के प्रहारों से राक्षसगण सर्वत्र नष्ट होने लगे और वे भागकर भूमि पर गिरकर हाहाकार करने लगे, तब विरुपाक्ष नामक एक अजेय राक्षस हाथ में धनुष लेकर अपना नाम पुकारता हुआ रथ से कूद पड़ा और हाथी की पीठ पर चढ़ गया॥13-14॥
 
When, in this manner, the demons were being destroyed everywhere by Sugreeva's blows and they began running and falling on the ground while wailing, then an invincible demon named Virupaksha, taking a bow in his hand, jumped from the chariot, announcing his name, and climbed on the back of the elephant.॥13-14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)