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ramayan 6.95.8: अपने स्वामी की विजय की इच्छा से सभी महारथी रावण का यथोचित सम्मान करते हुए हाथ जोड़कर उसके समक्ष खड़े हो गए।   |   ramayan सर्ग 6.95: रावण का अपने मन्त्रियों को बुलाकर शत्रुवधवि षयक अपना उत्साह प्रकट करना और सबके साथ रणभूमि में आकर पराक्रम दिखाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 95: रावण का अपने मन्त्रियों को बुलाकर शत्रुवधवि षयक अपना उत्साह प्रकट करना और सबके साथ रणभूमि में आकर पराक्रम दिखाना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  6.95.8 
प्रतिपूज्य यथान्यायं रावणं ते महारथा:।
तस्थु: प्राञ्जलय: सर्वे भर्तुर्विजयकाङ्क्षिण:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
अपने स्वामी की विजय की इच्छा से सभी महारथी रावण का यथोचित सम्मान करते हुए हाथ जोड़कर उसके समक्ष खड़े हो गए।
 
All those mighty warriors, desirous of their lord's victory, honoured Ravana in the due manner and stood before him with folded hands.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)