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श्लोक 6.95.52  |
निकृत्तशिरस: केचिद् रावणेन वलीमुखा:।
केचिद् विच्छिन्नहृदया: केचिच्छ्रोत्रविवर्जिता:॥ ५२॥ |
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| अनुवाद |
| रावण ने अनेक वानरों के सिर काट डाले, अनेकों की छाती छेद दी और अनेकों के कान उड़ा दिये। |
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| Ravana cut off the heads of many monkeys, pierced the chests of many and blew off the ears of many. |
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