श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 95: रावण का अपने मन्त्रियों को बुलाकर शत्रुवधवि षयक अपना उत्साह प्रकट करना और सबके साथ रणभूमि में आकर पराक्रम दिखाना  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  6.95.52 
निकृत्तशिरस: केचिद् रावणेन वलीमुखा:।
केचिद् विच्छिन्नहृदया: केचिच्छ्रोत्रविवर्जिता:॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
रावण ने अनेक वानरों के सिर काट डाले, अनेकों की छाती छेद दी और अनेकों के कान उड़ा दिये।
 
Ravana cut off the heads of many monkeys, pierced the chests of many and blew off the ears of many.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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