श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 95: रावण का अपने मन्त्रियों को बुलाकर शत्रुवधवि षयक अपना उत्साह प्रकट करना और सबके साथ रणभूमि में आकर पराक्रम दिखाना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  6.95.51 
तत: क्रुद्धो दशग्रीव: शरै: काञ्चनभूषणै:।
वानराणामनीकेषु चकार कदनं महत्॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
उस समय दस सिरवाला रावण क्रोधपूर्वक अपने सुवर्ण-मंडित बाणों द्वारा वानर सेनाओं में उत्पात मचाने लगा ॥51॥
 
At that time the ten-headed Ravana angrily began wreaking havoc among the monkey armies with his gold-decorated arrows. ॥ 51॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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