श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 95: रावण का अपने मन्त्रियों को बुलाकर शत्रुवधवि षयक अपना उत्साह प्रकट करना और सबके साथ रणभूमि में आकर पराक्रम दिखाना  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  6.95.50 
तेषां तु तुमुलं युद्धं बभूव कपिरक्षसाम्।
अन्योन्यमाह्वयानानां क्रुद्धानां जयमिच्छताम्॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वानरों और राक्षसों में भयंकर युद्ध छिड़ गया; वे सभी क्रोधपूर्वक एक-दूसरे को ललकारकर विजय की कामना करने लगे ॥50॥
 
Then a fierce battle broke out between the monkeys and the demons, each angrily challenging each other while seeking victory. ॥ 50॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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