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ramayan 6.95.5: उसने कहा - 'दुःस्वप्न! महाराज! शीघ्र जाकर महापार्श्व और राक्षस विरुपाक्ष से कहो - 'मेरी अनुमति से तुम सेनाओं को शीघ्र ही कूच करने का आदेश दो।'॥5॥   |   ramayan सर्ग 6.95: रावण का अपने मन्त्रियों को बुलाकर शत्रुवधवि षयक अपना उत्साह प्रकट करना और सबके साथ रणभूमि में आकर पराक्रम दिखाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 95: रावण का अपने मन्त्रियों को बुलाकर शत्रुवधवि षयक अपना उत्साह प्रकट करना और सबके साथ रणभूमि में आकर पराक्रम दिखाना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  6.95.5 
महोदरं महापार्श्वं विरूपाक्षं च राक्षसम्।
शीघ्रं वदत सैन्यानि निर्यातेति ममाज्ञया॥ ५॥
 
 
अनुवाद
उसने कहा - 'दुःस्वप्न! महाराज! शीघ्र जाकर महापार्श्व और राक्षस विरुपाक्ष से कहो - 'मेरी अनुमति से तुम सेनाओं को शीघ्र ही कूच करने का आदेश दो।'॥5॥
 
He said, 'Nightmares! Sir, go quickly and tell Mahaparshva and Rakshasa Virupaksha - 'With my permission, you order the armies to march immediately'. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)