श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 95: रावण का अपने मन्त्रियों को बुलाकर शत्रुवधवि षयक अपना उत्साह प्रकट करना और सबके साथ रणभूमि में आकर पराक्रम दिखाना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  6.95.43 
ततो नष्टप्रभ: सूर्यो दिशश्च तिमिरावृता:।
द्विजाश्च नेदुर्घोराश्च संचचाल च मेदिनी॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
उस समय सूर्य का तेज लुप्त हो गया, सब ओर अंधकार छा गया, भयंकर पक्षी अशुभ शब्द करने लगे और पृथ्वी डोलने लगी ॥ 43॥
 
At that time the radiance of the Sun faded away. Darkness spread in all directions, dreadful birds began to utter ominous words and the earth began to shake. ॥ 43॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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