श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 95: रावण का अपने मन्त्रियों को बुलाकर शत्रुवधवि षयक अपना उत्साह प्रकट करना और सबके साथ रणभूमि में आकर पराक्रम दिखाना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  6.95.41 
ततो युद्धाय तेजस्वी रक्षोगणबलैर्वृत:।
निर्ययावुद्यतधनु: कालान्तकयमोपम:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् काल, मृत्यु और यमराज के समान भयंकर रावण ने अपना धनुष हाथ में लिया और राक्षसों की सेना से घिरा हुआ युद्ध के लिए आगे बढ़ा ॥ 41॥
 
Thereafter Ravana, who was as fearsome as Time, Death and Yamaraja, took his bow in his hand and surrounded by the army of demons, advanced for the battle. ॥ 41॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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