श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 95: रावण का अपने मन्त्रियों को बुलाकर शत्रुवधवि षयक अपना उत्साह प्रकट करना और सबके साथ रणभूमि में आकर पराक्रम दिखाना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  6.95.40 
ते तु हृष्टाभिनर्दन्तो भिन्दन्त इव मेदिनीम्।
नादं घोरं विमुञ्चन्तो निर्ययुर्जयकाङ्क्षिण:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
वे खुशी से ऐसे दहाड़ रहे थे मानो धरती फाड़ डालेंगे। अपने हृदय में विजय की अभिलाषा लिए वे जोर-जोर से दहाड़ते हुए नगर से बाहर निकले।
 
They were roaring with joy as if they would tear the earth apart. With the desire of victory in their hearts, they came out of the city roaring loudly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)