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ramayan 6.95.4: वह राक्षसराज अपने पास खड़े राक्षसों से अस्पष्ट शब्दों में बातें करने लगा। उस समय वह उधर इस प्रकार देख रहा था मानो उन्हें अपनी आँखों से जला डालेगा।   |   ramayan सर्ग 6.95: रावण का अपने मन्त्रियों को बुलाकर शत्रुवधवि षयक अपना उत्साह प्रकट करना और सबके साथ रणभूमि में आकर पराक्रम दिखाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 95: रावण का अपने मन्त्रियों को बुलाकर शत्रुवधवि षयक अपना उत्साह प्रकट करना और सबके साथ रणभूमि में आकर पराक्रम दिखाना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  6.95.4 
उवाच च समीपस्थान् राक्षसान् राक्षसेश्वर:।
क्रोधाव्यक्तकथस्तत्र निर्दहन्निव चक्षुषा॥ ४॥
 
 
अनुवाद
वह राक्षसराज अपने पास खड़े राक्षसों से अस्पष्ट शब्दों में बातें करने लगा। उस समय वह उधर इस प्रकार देख रहा था मानो उन्हें अपनी आँखों से जला डालेगा।
 
That demon king started talking in unclear words to the demons standing near him. At that time he was looking there as if he would burn them with his eyes. 4.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)