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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 95: रावण का अपने मन्त्रियों को बुलाकर शत्रुवधवि षयक अपना उत्साह प्रकट करना और सबके साथ रणभूमि में आकर पराक्रम दिखाना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  6.95.36 
आगतो रक्षसां राजा छत्रचामरसंयुत:।
सीतापहारी दुर्वृत्तो ब्रह्मघ्नो देवकण्टक:।
योद‍्धुं रघुवरेणेति शुश्रुवे कलहध्वनि:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
सीता का अपहरण करने वाला, दुष्ट, ब्राह्मण का हत्यारा और देवताओं के लिए काँटा, राक्षसराज रावण छत्र और पंखा लेकर भगवान रघुनाथ से युद्ध करने के लिए आ रहा है।’ ऐसी बेसुरी ध्वनियाँ उसके कानों में पड़ रही थीं।
 
The demon king Ravana, the kidnapper of Sita, the wicked man, the killer of a brahmin and a thorn for the gods, is coming with an umbrella and a fan to fight with Lord Raghunath.' Such discordant sounds were reaching his ears.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)