श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 95: रावण का अपने मन्त्रियों को बुलाकर शत्रुवधवि षयक अपना उत्साह प्रकट करना और सबके साथ रणभूमि में आकर पराक्रम दिखाना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  6.95.35 
ततश्चासीन्महानादस्तूर्याणां च ततस्तत:।
मृदङ्गै: पटहै: शङ्खै: कलहै: सह रक्षसाम्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
फिर सब ओर बाजे-गाजे की ध्वनि गूंज उठी। ढोल, मृदंग, शंख और राक्षसों के झगड़ों का शब्द भी उसमें मिल गया। 35.
 
Then the sound of musical instruments resounded everywhere. The sound of drums, cymbals, conches and the quarrels of demons were also mixed in it. 35.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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