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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 95: रावण का अपने मन्त्रियों को बुलाकर शत्रुवधवि षयक अपना उत्साह प्रकट करना और सबके साथ रणभूमि में आकर पराक्रम दिखाना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  6.95.34 
तत: प्रयात: सहसा राक्षसैर्बहुभिर्वृत:।
रावण: सत्त्वगाम्भीर्याद् दारयन्निव मेदिनीम्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, अनेक राक्षसों से घिरा हुआ रावण अचानक युद्ध के लिए आगे बढ़ा। वह अपने महान बल से पृथ्वी को विदीर्ण कर रहा था।
 
Thereafter, surrounded by many demons, Ravana suddenly advanced for the battle. He was tearing the earth apart with his great strength.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)