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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 95: रावण का अपने मन्त्रियों को बुलाकर शत्रुवधवि षयक अपना उत्साह प्रकट करना और सबके साथ रणभूमि में आकर पराक्रम दिखाना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  6.95.31 
नानारत्नपरिक्षिप्तं रत्नस्तम्भैर्विराजितम्।
जाम्बूनदमयैश्चैव सहस्रकलशैर्वृतम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
उसमें नाना प्रकार के रत्न जड़े हुए थे, रत्नजटित स्तंभ उसकी शोभा बढ़ा रहे थे और वह हजारों स्वर्ण कलशों से सुशोभित था।
 
Various kinds of gems were embedded in it. Gemstone pillars enhanced its beauty and it was decorated with thousands of golden pots.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)