श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 95: रावण का अपने मन्त्रियों को बुलाकर शत्रुवधवि षयक अपना उत्साह प्रकट करना और सबके साथ रणभूमि में आकर पराक्रम दिखाना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  6.95.30 
दिव्यास्त्रवरसम्पन्नं नानालंकारभूषितम्।
नानायुधसमाकीर्णं किङ्किणीजालसंयुतम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
उसमें उत्तम दिव्य अस्त्र-शस्त्र थे, वह रथ अनेक प्रकार के आभूषणों से सुशोभित था, उसमें नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्र थे और वह रथ घण्टाकार झालरों से सुशोभित था।
 
It had excellent divine weapons in it, the chariot was decorated with many kinds of ornaments. It had various weapons and the chariot was decorated with bell-shaped fringes. 30.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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