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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 95: रावण का अपने मन्त्रियों को बुलाकर शत्रुवधवि षयक अपना उत्साह प्रकट करना और सबके साथ रणभूमि में आकर पराक्रम दिखाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  6.95.3 
संदश्य दशनैरोष्ठं क्रोधसंरक्तलोचन:।
राक्षसैरपि दुर्दर्श: कालाग्निरिव मूर्तिमान्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
उसने अपने होंठ काट लिए। उसकी आँखें क्रोध से लाल हो गईं। वह विनाश की सजीव अग्नि जैसा लग रहा था। राक्षसों के लिए भी उसकी ओर देखना मुश्किल हो गया।
 
He bit his lips. His eyes turned red with anger. He looked like a living fire of destruction. It became difficult even for the demons to look at him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)