श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 95: रावण का अपने मन्त्रियों को बुलाकर शत्रुवधवि षयक अपना उत्साह प्रकट करना और सबके साथ रणभूमि में आकर पराक्रम दिखाना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  6.95.19 
अद्य मद‍्बाणनिर्भिन्नै: प्रस्तीर्णैर्गतचेतनै:।
करोमि वानरैर्युद्धे यत्नावेक्ष्यतलां महीम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
आज युद्ध में मेरे बाणों से बिंधकर प्राणहीन हो जाने वाले वानर इस प्रकार फैल जाएँगे कि वहाँ की भूमि बड़ी कठिनाई से दिखाई देगी ॥19॥
 
Today in the war the monkeys pierced by my arrows and become lifeless will be spread out in such a way that the ground there will be visible with great difficulty. ॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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