श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 95: रावण का अपने मन्त्रियों को बुलाकर शत्रुवधवि षयक अपना उत्साह प्रकट करना और सबके साथ रणभूमि में आकर पराक्रम दिखाना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  6.95.18 
हतो भ्राता च येषां वै येषां च तनयो हत:।
वधेनाद्य रिपोस्तेषां करोम्यश्रुप्रमार्जनम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
आज शत्रुओं का संहार करके मैं उन सब राक्षसों के आँसू पोंछूँगा जिनके भाई-पुत्र इस युद्ध में मारे गए हैं॥18॥
 
After killing the enemy today I will wipe the tears of all those demons whose brothers and sons have been killed in this war.॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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