श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 95: रावण का अपने मन्त्रियों को बुलाकर शत्रुवधवि षयक अपना उत्साह प्रकट करना और सबके साथ रणभूमि में आकर पराक्रम दिखाना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  6.95.17 
अद्य यूथप्रचण्डानां हरीणां द्रुमयोधिनाम्।
मुक्तेनैकेषुणा युद्धे भेत्स्यामि च शतं शतम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
आज युद्धभूमि में मैं अपने धनुष से छोड़े हुए प्रत्येक बाण से वृक्षों से लड़ने वाले सैकड़ों भयंकर वानरों को बींध डालूँगा।॥17॥
 
‘Today on the battlefield, with each arrow shot from my bow, I shall pierce through hundreds of fierce monkeys fighting with trees.॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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