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श्लोक 6.95.15  |
व्याकोशपद्मवक्त्राणि पद्मकेसरवर्चसाम्।
अद्य यूथतटाकानि गजवत् प्रमथाम्यहम्॥ १५॥ |
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| अनुवाद |
| केसर कमल की चमक वाले वानरों के यौवन सरोवरों के समान हैं। उनके मुख उन सरोवरों के भीतर खिले हुए कमलों के समान शोभायमान हैं। आज मैं हाथी के समान उनमें प्रवेश करके उन वानर यौवन रूपी सरोवरों का मंथन करूँगा॥ 15॥ |
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| ‘The youth of the monkeys with the lustre of saffron lotus are like lakes. Their faces look beautiful like blooming lotuses inside those lakes. Today I will enter them like an elephant and churn those lakes of monkey youth.॥ 15॥ |
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