श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 95: रावण का अपने मन्त्रियों को बुलाकर शत्रुवधवि षयक अपना उत्साह प्रकट करना और सबके साथ रणभूमि में आकर पराक्रम दिखाना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  6.95.14 
अद्य वानरसैन्यानि रथेन पवनौजसा।
धनु:समुद्रादुद्भूतैर्मथिष्यामि शरोर्मिभि:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
आज मैं वायु के समान वेगवान रथ पर सवार होकर अपने धनुष रूपी सागर से उठने वाली बाणों की तरंगों द्वारा वानर सेनाओं का मंथन करूँगा॥ 14॥
 
Today, riding on a chariot as swift as the wind, I will churn the monkey armies with the waves of arrows rising from the ocean of my bow.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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