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श्लोक 6.95.14  |
अद्य वानरसैन्यानि रथेन पवनौजसा।
धनु:समुद्रादुद्भूतैर्मथिष्यामि शरोर्मिभि:॥ १४॥ |
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| अनुवाद |
| आज मैं वायु के समान वेगवान रथ पर सवार होकर अपने धनुष रूपी सागर से उठने वाली बाणों की तरंगों द्वारा वानर सेनाओं का मंथन करूँगा॥ 14॥ |
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| Today, riding on a chariot as swift as the wind, I will churn the monkey armies with the waves of arrows rising from the ocean of my bow.॥ 14॥ |
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