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श्लोक 6.95.13  |
अद्य वानरमुख्यानां तानि यूथानि भागश:।
धनुषा शरजालेन वधिष्यामि पतत्त्रिणा॥ १३॥ |
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| अनुवाद |
| ‘आज मैं अपने धनुष से पंखयुक्त बाणों का जाल बिछाऊँगा और वानरों के मुख्य समूहों को अलग-अलग मार डालूँगा।॥13॥ |
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| ‘Today I will spread a net of winged arrows with my bow and kill the main groups of monkeys separately.॥ 13॥ |
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