श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 95: रावण का अपने मन्त्रियों को बुलाकर शत्रुवधवि षयक अपना उत्साह प्रकट करना और सबके साथ रणभूमि में आकर पराक्रम दिखाना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  6.95.12 
नैवान्तरिक्षं न दिशो न च द्यौर्नापि सागरा:।
प्रकाशत्वं गमिष्यन्ति मद‍्बाणजलदावृता:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
मेरे बाण बादलों के समान सब ओर छा जाएँगे; अतएव अंतरिक्ष, दिशाएँ, आकाश और समुद्र - कुछ भी दिखाई नहीं देगा॥12॥
 
‘My arrows will cover every side like clouds; hence the space, directions, sky and sea - nothing will be visible.॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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