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श्लोक 6.95.12  |
नैवान्तरिक्षं न दिशो न च द्यौर्नापि सागरा:।
प्रकाशत्वं गमिष्यन्ति मद्बाणजलदावृता:॥ १२॥ |
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| अनुवाद |
| मेरे बाण बादलों के समान सब ओर छा जाएँगे; अतएव अंतरिक्ष, दिशाएँ, आकाश और समुद्र - कुछ भी दिखाई नहीं देगा॥12॥ |
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| ‘My arrows will cover every side like clouds; hence the space, directions, sky and sea - nothing will be visible.॥ 12॥ |
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